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अब ओरिजिनल DL और RC लेकर चलने की जरूरत नहीं, मोदी सरकार ने दी यह नई सुविधा

अब ड्राइविंग के समय कोई पुलिसवाला आपसे ओरिजिनल दस्‍तावेज दिखाने को नहीं कहेगा. क्‍योंकि रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍ट्री ने ट्रैफिक पुलिस और राज्‍य के परिवहन विभाग को निर्देश दिया है कि अगर कोई चालक डिजिलॉकर या एमपरिवहन ऐप के जरिए आपको डीएल, आरसी या बीमा दिखाता है तो उसे वैध दस्‍तावेज माना जाए. यानि अब इन दस्‍तावेजों को साथ लेकर चलने की जरूरत नहीं रही.

कैसे करेगा काम

  • डिजिलॉकर या एमपरिवहन ऐप को अपने मोबाइल फोन पर डाउनलोड कर लें.
  • इसे आधार नंबर दर्ज कर ऑथनटिकेट कर लें.
  • इसके बाद डीएल या रजिस्‍ट्रेशन नंबर उस दस्‍तावेज को ऐप पर डाउनलोड कर लें.
  • जांचकर्ता आपके मोबाइल से क्‍यूआर कोड स्‍कैन कर लेगा और उसे इसका ब्‍योरा उपलब्‍ध हो जाएगा.
  • इसके बाद वे सेंट्रल डाटाबेस में अगर कोई उल्‍लंघन होता है तो उसे दर्ज कर पाएंगे.

कई बार खो जाते हैं दस्‍तावेज
टाइम्‍स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक ओवर स्‍पीडिंग, ट्रैफिक सिग्‍नल लांघने या ड्राइविंग के समय मोबाइल पर बात करते पकड़े जाने पर पुलिस वाले डीएल जब्‍त कर लेते हैं. ऐसे में कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनमें ओरिजिनल डीएल खो गया. इससे डीएल धारक को काफी परेशानी उठानी पड़ती है. उन्‍हें रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ती है. इसके बाद कहीं जाकर आरटीओ से डुप्‍लीकेट डीएल जारी होता है.

ई-चालान से दर्ज हो जाता है ट्रैफिक नियम का उल्‍लंघन
रोड ट्रांसपोर्ट मिनिस्‍ट्री की एडवाइजरी के मुताबिक ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले ड्राइवर की घटना ई-चालान होने पर वाहन या सारथी डाटाबेस में खुदबखुद दर्ज हो जाती है. इसलिए अब चालान हाथ से काटने की जरूरत खत्‍म हो गई है. मिनिस्‍ट्री का कहना है कि डिजिलॉकर या एमपरिवहन पर उपलब्‍ध इले‍क्‍ट्रॉनिक रिकॉर्ड को वैध माना गया है. यह आईटी एक्‍ट 2000 के तहत वैध माना गया है. साथ ही मोटर व्‍हीकल्‍स एक्‍ट 1988 के तहत भी वैलिड है.

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