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यूनिक आइडी से रुकेगा शिक्षकों का फर्जीवाड़ा

कानपुर : माध्यमिक विद्यालयों में अपने परिचितों को शिक्षक बनाने के खेल पर रोक लगेगी। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद यूनिक आइडेंटिटी कार्ड जारी करेगा। इससे शिक्षक का पूरा ब्योरा ऑनलाइन होगा। बोर्ड परीक्षा की प्रायोगिक परीक्षा में परिचित को परीक्षक बनाने का खेल खुलने के बाद यह निर्णय लिया गया था। हालांकि यूनिक आइडी जारी करने की कवायद बोर्ड परीक्षा 2018 में ही पूरी होनी थी लेकिन कॉलेजों से गलत जानकारी मिलने के कारण योजना परवान नहीं चढ़ सकी।

बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव ने कुछ दिन पहले डीआइओएस को भेजे गए निर्देश में इस बात का जिक्र भी किया। निर्देश दिया कि स्कूल के प्रधानाचार्य और प्रबंधक शिक्षकों का जो डाटा फीड करेंगे, उसमें शिक्षणेत्तर कर्मी, चपरासी या किसी अन्य व्यक्ति की जानकारी न हो। वहीं, कार्ड बनने से माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर सुधरेगा और शिक्षकों की वास्तविक कमी भी सामने आ सकेगी।

जल्द सामने आएगा आंकड़ा

500 से ज्यादा वित्तविहीन विद्यालयों में 3500-4000 शिक्षक हैं। 100 से अधिक शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या 1500-2000 है। अब स्थाई व अस्थाई शिक्षक का आंकड़ा नई व्यवस्था में सामने आएगा।

शिक्षकों की जो जानकारी मागी जा रही है, बस उसके चलते उन्हें कोई परेशानी न हो, इसका ध्यान विभाग को रखना होगा। कार्ड जारी होंगे तो ये एक बेहतर पहल है।

-राज बहादुर सिंह चंदेल, शिक्षक एमएलसी

शिक्षकों की ओर से जो जानकारी पहले दी गईं, उनमें कई गड़बड़िया मिली थीं। ऐसे में डीआइओएस को भी अपने स्तर पर सभी जानकारियों को ठीक ढंग से दिखवाना होगा। कार्ड जारी करने संबंधी कवायद की जा रही है।

-नीना श्रीवास्तव, सचिव यूपी बोर्ड

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