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आइआइटी कानपुर का ड्रोन बताएगा आसमान में कितना प्रदूषण, समय रहते कर सकते समाधान

कानपुर : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर अब आसमान तक प्रदूषण का स्तर मापेगा। हानिकारक गैसों का घनत्व जमीन के मुकाबले ऊंचाई पर कितना होगा, उसकी जानकारी के साथ ही बारिश या हवा के साथ नीचे आने वाला हो तो उससे बचाव के उपाय भी तलाशे जा सकेंगे। इसके लिए यहां एयरोस्पेस इंजीनियरिंग और सिविल इंजीनियरिंग विभाग मिलकर ‘ड्रोन एयर पॉल्यूशन मॉनीटरिंग सिस्टम तैयार कर रहे हैं।

इसके लिए आइआइटी ने अमेरिका की एयर सैंपलर कंपनी से करार किया है। आइआइटी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अभिषेक ने बताया कि ड्रोन एयर पॉल्यूशन मॉनीटरिंग सिस्टम की मदद से ऊंचाई पर प्रदूषण के स्तर का पता चल सकेगा। हानिकारक गैसें कितनी अधिक प्रभावी होती हैं, उसकी सटीक जानकारी मिल जाएगी। इसके अलावा उनके नीचे आने की स्थिति में पहले से ही बचाव के इंतजाम किए जा सकेंगे।

वायु प्रदूषण का त्रिस्तरीय आकलन

ड्रोन में एक से दो किलो वजन का मोबाइल एयर सैंपलर लगाया जाएगा। यह डिजिटल तकनीक पर आधारित होगा। जमीन से ऊपर उठते ही यह प्रदूषण के थ्री डाइमेंशनल (त्रिआयामी) स्तर का आकलन कर लेगा।

सीरीज में छोड़े जाएंगे ड्रोन

वायु प्रदूषण की गहन जांच के लिए वैज्ञानिक ड्रोन की सीरीज बनाकर उसे हवा में छोड़ देंगे। एक सीरीज में छह से आठ ड्रोन होते हैं। यह थोड़ी-थोड़ीदूरी पर प्रदूषण के घटते बढ़ते असर की रिपोर्ट देंगे।

धुएं में कितनी देर रहते दूषित कण

आइआइटी के वैज्ञानिक धुएं पर भी शोध करेंगे। इसमें देखा जाएगा कि अत्याधिक ऊंचाई पर धुएं में कितनी देर तक दूषित कण बने रहते हैं। एक जगह से दूसरी जगह पर जाने से उसका क्या असर रहता है।

संस्थान में होगी टेस्टिंग

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. अभिषेक, सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो.सलिल गोयल और प्रो.अनुभा मिलकर ड्रोन एयर सैंपलर तैयार कर रहे हैं। इसकी टेस्टिंग अगले महीने संस्थान में की जाएगी। उसके बाद कानपुर और अन्य जिलों में वायु प्रदूषण पर काम किया जाएगा।

सीपीसीबी से हो चुकी बातचीत

ड्रोन एयर पॉल्यूशन मॉनीटरिंग सिस्टम के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) से बातचीत हो चुकी है। उनके तकनीकी कर्मी प्रदूषण का डाटा तैयार करने में मदद करेंगे।

प्रदूषण के खतरे पर नाकाफी सिस्टम

प्रदूषण के बढ़ते खतरे को देखते हुए मौजूदा सिस्टम नाकाफी है। शहर में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) के छह और सीपीसीबी के एक ही मॉनीटरिंग सेंटर हैं।

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