कानपुर समाचार

ताज़ा खबरें

दिव्यांगों का साथ देगा आइआइटी का हाथ

कानपुर : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर का हाथ दिव्यांगों का साथ देगा। वह भी सामान्य व्यक्तियों की तरह अपनी दैनिक जरूरतों और आवश्यकताओं को पूरा कर सकेंगे।

मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के मास्टर ऑफ साइंस (एमएस) बाई रिसर्च के छात्र निशांत अग्रवाल ने खास तरह का रोबोटिक हाथ बनाया है। ये दिमाग के संकेतों पर काम करता है। इसकी खासियत यह है कि इसे बिना ऑपरेशन शरीर में फिट किया जा सकता है। यह रोबोटिक हाथ उनके लिए है जिनका दुर्घटना या किसी अन्य कारण से कोहनी के नीचे का हिस्सा नहीं है।

इस तरह करेगा काम

विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर में बह रहा करंट (0.7 मिली एम्पीयर) हाथ को मूवमेंट (हरकत) करने के लिए कहता है। रोबोटिक हाथ इलेक्ट्रोमायोग्राफ (ईएमजी) तकनीक पर काम करेगा। इसमें ईसीजी में सीने पर लगाई जाने वाली चिप की तरह ही दो ईएमजी चिप लगी हैं। इन्हें कोहनी के ऊपर लगाने से शरीर का करंट रोबोटिक हाथ में लगे माइक्रो कंट्रोलर तक पहुंचता है। यहां से 3.7 वोल्ट की बैटरी तक जाकर करंट अंगुलियो में हरकत लाता है। बैटरी को मोबाइल एडॉप्टर से चार्ज किया जा सकेगा।

800 ग्राम तक वजन उठा सकेगा

यह कृत्रिम हाथ 800 ग्राम तक का वजन उठा सकेगा। हर वस्तु के अनुरूप अंगुलियां अपनी मूवमेंट कर सकती हैं। इनमें सेंसर लगे हुए हैं।

दो साल में हुआ तैयार

मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. नीरज सिन्हा, प्रो. पंकज वाही के निर्देशन में छात्र ने दो साल की मेहनत से इसे तैयार किया है। इसमें तकरीबन 15 हजार रुपये खर्च आया है। पेटेंट कराया अब आगे बढ़ाएंगे

– यह पॉलीविनाइल क्लोराइड (पीवीसी) से तैयार हुआ है। इसकी अनुमानित कीमत आठ हजार रुपये आंकी गई है।

– बाजार में आ रहे 15 लाख रुपये के कृत्रिम हाथों से यह बेहद सस्ता है

– मारुति सुजुकी के चेयरमैन आरसी भार्गव छात्र को सिडबी इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन हब में सम्मानित कर चुके हैं।

आइआइटी द्वारा तैयार रोबोटिक हाथ दिव्यांगों के लिए मददगार साबित होगा। इसको और बेहतर बनाने के प्रयास शुरू हो गए हैं।

– प्रो. नीरज सिन्हा, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, आइआइटी

Please Follow & Like us:
0

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *